मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 27 of 31

श्री हरिवंश स्वरूप हैं, श्रीहरिदास उदार। जे जे बातें महल की, बरनत नित्य विहार॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (18) श्री हरिवंश स्वरूप हैं, श्री हरिदास उदार हैं। जे जे बातें महल की, बरनत नित्य विहार.. - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (18)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग