मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग
Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि
Verse 28 of 31
श्री ललिता हरिवंश वपु, प्रगटी रसनिधि आय।
चरन माधुरी कुंवर की, दीनी सबन जनाय॥
- श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (16)
श्री ललिता हरिवंश वपु, प्रगति रसनिधि अय। हर दिन मुझे माधुरी कुँवर के चरणों का एहसास होता है.. - श्री वंशी अली, दिल ही सब कुछ है (16)