मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 4 of 31

हंस हंस कंठ लगाय है, मोको मेरी जीव। अपनी खण्डित बीड़िका, देहै मोहे अमीव॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (46) एचएनएस एचएनएस कंठ लगे है, मोको मेरी जिव। अपनी खंडित बिदाईका, देहि मोहे अमीव.. - श्री वंशी अली, हृदय सर्वस्व (46)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग