मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग

Hriday Sarvasva — श्री वंशी अलि

Verse 5 of 31

हौं कहि हों नाहिंन कछू, पोढ़ी कुंवर सुखरास। निरखि निरखि मोकों बढ़ै, श्री राधा मुख की प्यास॥ - श्री वंशी अलि, हृदय सर्वस्व (43) मैं कहाँ हूँ? निरखि निरखि मोकोन बधाई, श्री राधा मुख की प्यास.. - श्री वंशी अली, हृदय ही सब कुछ है (43)
मोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँगमोसों हँसि हो लाडिली हौं हँसिंहों तेहि सँग