द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 16 of 69

(राग कान्हरौ) गुन की बात राधे तेरे आगैं को जानैं जो जानैं सो कछु उनहारि। [1] नृत्य गीत ताल भेदनि के बिभेद जानैं कहूँ जिते किते देखे झारि॥ [2] तत्त्व सुद्ध स्वरूप रेख परमान जे बिज्ञ सुधर ते पचे भारि। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी नैंक तुम्हारी प्रकृति के अंग अंग और गुनी परे हारि॥ [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (23) (राग कान्हरौ) गुन की बात राधे तेरे को फिर जाने जाणे जो जाणे सो कछु उनहारी। [1] नृत्य गीत ताल भेदनी के बिभेद जनैन कहूं जीते पतंग देखे झड़ी.. [2] तत्व शुद्ध रूप रेख परमन जे बिजनि सुधार ते पाछे भारी। [3] श्री हरिदास के स्वामी श्याम कुंजबिहारी नैनक, कण-कण का स्वभाव और गुण हरि से परे है.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (23)
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादाद्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा