द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 17 of 69
(राग कान्हरौ)
सुघर भयै हौ बिहारी याही छाँह तें।
जे जे गटी सुघर सुर जानपनें की
ते ते याही बाँह तें॥ [1]
हुते तौ बड़े अधिक सब ही तैं,
पै इनकी कस न खटात याँह तैं॥ [2]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
जकि रहे चाह तें॥ [3]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (24)
(राग कान्हरौ) सुघर भयि हौ बिहारी याहि चानह तेन। जे जे गति सुघर सुर जानेपें की ते याही बाण तेन.. [1] यदि आप सब के बड़े आधे होते, तो आप यहां कुछ भी नहीं खाते.. [2] श्री हरिदास के स्वामी श्याम कुंजबिहारी बने रहते हैं.. [3] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (24)