श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हित

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 18 of 69

(राग कान्हरो) राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं न कहूँ गयौ सुनि सुनि राधे तेरी सौं॥ [1] मोहिं न पत्याहु तौ संग हरिदासी हुती बूझि देखि भटू कहिधौं कहा भयौ मेरी सौं॥ [2] प्यारी तोहिं गठौंद न प्रतीति छाँड़ि छिया जानि दे इतनीब एरी सौं। [3] गहि लपटाइ रहे छैल दोऊ छाती सौं छाती लगाई फेरा फेरी सौं॥ [4] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (25) (राग कान्हारो) राधा रसिक कुंजबिहारी कहत जु हौं न कहूं गयो सुनि सुनि राधे तेरे पुत्र.. [1] मोहिं न पत्याहु संग हरिदासी होति भुजि देखि भातु कहिदों कह भयौ मेरे लाल.. [2] प्यारी तोहि गठौंद न प्रति छंदै छिया जानि दे इतानिब एरी सौं। [3].
द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादाद्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा