द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 19 of 69

(राग कान्हरौ) नील लाल गौर के ध्यान बैठे कुंजबिहारी। ज्यौं ज्यौं सुख पावत नाहीं त्यौं त्यौं दुख भयौ भारी॥ [1] अरबराइ प्रगट भई जु सुख भयौ बहुत हिया री। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी करि मनुहारी॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (28) (राग कान्हारौ) नील लाल गौर के ध्यान में बैठे कुंजाबिहारी। सुख मिलते ही दुःख भारी हो जाता है। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी कारी मनुहारी.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (28)
श्रीराधावल्लभ तुम मेरे हितबिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी