बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 20 of 69
(राग केदारौ)
ऐसी तौ बिचित्र जोरी बनी।
ऐसी कहूँ देखी सुनी न भनी॥
मनहुँ कनक सुदाह करि करि देह अद्भुत न ठनी।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम तमालै उछंगि बैठी धनी॥
- ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (31)
(राग केदारौ) ऐसी तौ विचित्र जोरि बानी। बस इतना कह दूं, मैंने देखा है, सुना है, महसूस नहीं किया है.. काश कनक मुझे बेहतर महसूस करा पाती, मेरा शरीर एक अद्भुत जगह पर नहीं है। श्री हरिदास श्याम तमलाई उछंगी बैठी धणी.. - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमल (31)