देखि देखि फूल भई
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 21 of 69
(राग कान्हरौं)
हँसत खेलत बोलत मिलत देखौ मेरी आँखिन सुख।
बीरी परस्पर लेत खवावत ज्यौं घन दामिनि
चमचमाप सोभा बहु भाँतिन सुख॥ [1]
स्तुति घुरि राग केदारौ जम्यौ
अधराति निसा रोम रोम सुख।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
के गावत सुर देत मोर भयौ परम सुख॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (32)
(राग कन्हारौं) हंसना, खेलना, बातें करना, मिलना, आंखों में खुशी देखना। बीरी मटरकाल लेत खवावत ज्यों घन दामिनी चमचम सोभा बहु भंतिन सुख.. [1] स्तुति घुरि राग केदारौ जम्यौ अधरति निसा रोम रोम सुख। श्री हरिदास के स्वामी श्याम कुंजबिहारी के गावत सुर देत मोर भयौ परम सुख.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (32)