प्यारी अब सोइ गई

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 28 of 69

(राग केदारौ) सोई तौ बचन मोसौं मानि तैं मेरौ लाल मोह्यौ री साँवरौ। नव निकुंज सुख पुंज महल में सुबस बसौ यह गाँवरौ॥ [1] नव नव लाड़ लड़ाइ लाड़िली नहिं नहिं यह ब्रज जाँवरौ। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी पै बारौंगी मालती भाँवरौ॥ [2] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलिमाल (44) (राग केदारौ) सोइ तौ बचन मोसौं मनि तैं मेरौ लाल मोहयौ री सावंरौ। नव निकुंज सुख पुंज महल में सुबास बसौ यः गँवरौ।।[1] नव नव लाडा लड़ै लड़िली नहीं, नहिं यः ब्रज जंवरौ। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी पै बरौंगी मालती भंवरु.. [2] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (44)
बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनीबिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी