बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 29 of 69

(राग केदारौ) जो कछु कहत लाड़िलौ लाड़िली जू सुनियै कान दै। [1] जो जिय उपजै सो तिहारेई हित की कहत हौं आन दे॥ [2] मोहिं न पत्याहु तौ छाती टकटोरि देखौ पान दै। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी जाचक कौं दान दै॥ [4] -ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (45) (राग केदारौ) सुनिए कछुआ लड़ाई के बारे में क्या कहता है। [1] मैं कहता हूं, जीवन जो कुछ उत्पन्न करता है, वह मैं तुम्हें नहीं दूंगा। [3] दान देने वाले श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी जाचक.. [4] -ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (45)
प्यारी अब सोइ गईबिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी