बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 30 of 69
(राग केदारौ)
प्यारी जू आगै चलि आगैं चलि
गहवर बन भीतर जहाँ बोलै कोइल री।
अति ही बिचित्र फूल पत्रनि की सेज्या रची
रुचिर सँवारी तहाँ तूब सोइल री॥ [1]
छिन छिन पल पल तेरीऐ कहानी तुव मग जोइल री।
श्रीहरिदास के स्वामी स्याम कहत छबीलौ
काम रस भोलइ री॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (46)
(राग केदारौ) प्रिये, तुम आगे आये और फिर गहरे आये, जहाँ कोई बोला। फूलों की रानी की पत्नी, मिट्टी के टब की दिलचस्प सुंदरता बड़ी अजीब है.. [1] आपकी कहानी हर पल आनंददायक है। स्वामी हरिदास के स्वामी संयम कहत छबीलौ काम रस भोलै री.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (46)