बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 31 of 69
(राग केदारौ)
प्यारी अब सोइ गई।
जयौं जयौं जगावत त्यौं त्यौं नहिं जागत
प्रेम रस पान करि भोई गई॥ [1]
जागत होइ तौ जगाउँ प्यारी तातैंब परम सचु
रस ही रसिक रस बोई गई।
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी
उठिकैं गरैं लगाई नवल प्रीति सौं नोइ गई॥ [2]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (47)
(राग केदारौ) डार्लिंग, तुम अभी सो रहे हो। जय जय जय जगावत, प्रेम रस मत पियो जगौं.. [1] जगौं होइ तौ जगौं प्यारी, वही परम सच्चा रस है, रोमैंटिक रस ही बोया जाता है। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी ने उठ कर गाया नवल प्रीति सौं नोई.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (47)