बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 32 of 69
(राग केदारौ)
प्यारी पहिरैं चुनरी।
तैसोई लहँगा बन्यौ सिलसिलौ
पूरनमासी की सी पूनरी॥ [1]
हौं जु कहति चलिये मनमोहन मानैंगी नहिं घूनरी। [2]
श्रीहरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी
चरन लपटाने दुहूँन री॥ [3]
- ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (49)
(राग केदारौ) प्यारी पहिरैं चुनरी। तैसोइ लहंगा बनायौ सिलसिलेऊ पूरनमासी की पुनारी.. [1] कहूँगी हाँ मनमोहन, मनाऊँगी नहीं घुनारी। [2] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी, चरण मत छुओ.. [3] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (49)