बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 33 of 69

(राग केदारौ) बनी री तेरे चारि चारि चूरी करनि। कंठसिरी दुलरी हीरनि की नासा मुक्ता ढरनि॥ [1] तैसौई नैननि कजरा फबि रह्यौ निरखि काम डरनि। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी रीझि रीझि पग परनि॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (50) (राग केदारौ) बणी री तेरे चारी चारी छुरी करनी। कंठसिरी दुलारी हिरानी कि नासा मुक्ता धरणी.. [1] तैसौइ नैननि कजरा फबि रहयौ निरखि काम डारानी। श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी रिझि रिझि पग पराणी.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (50)
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