बचन दै मान न करौं
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 40 of 69
(राग कल्यान)
अजहूँ कहा कहति है री मारै नैंन आरनि। [1]
भौंहैं ज्यौं धनुष चितवनि बान बाँफिन
फौंक धरैं कहत स्याम प्यारनि॥ [2]
तू ही जीवन तू ही भूषन तू ही प्रान धन यारनि। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी सौं
मेरु भयौ बिहारनि॥ [4]
- श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (64)
(राग कल्याण) मैं कहां कहूं कि मैं मरा नहीं हूं? [1] भौहें धनुष के समान हैं और जूड़े के पंख 'स्याम प्यारी' कहते हुए चेतावनी के समान फड़फड़ा रहे हैं। [2] तुम ही प्राण हो, तुम ही आभूषण हो, तुम ही जीवन, धन और मित्रता हो। [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी मेरु भयौ बिहारानी के पुत्र हैं। [4] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (64)