द्वै लर मोतिन की एक पुंजा पोति कौ सादा
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 4 of 69
(राग कान्हरौ)
प्यारी तेरौ बदन अमृत की पंक तामें बींधे नैंन द्वै। [1]
चित चल्यौ काढ़नि कौं बिकच संधि संपुट में रह्यौ भ्वै॥ [2]
बहुत उपाइ आहि री प्यारी पै न करत स्वे। [3]
श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी ऐसैंई रहौ ह्वै॥ [4]
-ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (7)
(राग कान्हरौ) मेरे प्यारे बदन, तेरी आँखों में अमृत का रस बंधा है। [1]. [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी अइसैनी रहो हावै.. [4] -ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (7)