ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 41 of 69

(राग सारंग) प्यारी तू गुननि राइ सिरमौर। गति में गति उपजति नाना राग रागिनी तार मंदर सुर घोर॥ [1] काहू कछू लियौ रेख छाया तौ कहा भयौ झूठी दौर। कहिं श्रीहरिदास लेत प्यारी जू के तिरप लागनि में किसोर॥ [2] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (65) (राग सारंगा) प्यारी तू गुणणी रै सिरमौर। गति पुरुष गति उपजति नाना राग रागिनी तार मंदर सूर घोर.. [1] काहु कछू लियौ रेख छय तौ काहा भयौ झूठी दौर। कहिन श्री हरिदास, प्रियतम का प्रेम फैलाओ.. [2] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (65)
बचन दै मान न करौंऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि