ऐसैं बसिऐ ब्रज की बीथिनि

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 42 of 69

(राग सारंग) प्यारी तौपै कितौक संग्रह छबिन कौ अंग अंग प्रति नाना भाइ दिखावति। [1] हाथ किन्नरी मध्य सचु पाँइ सुलप राग रागिनी सौं तू मिलि गावति॥ [2] कहा कहौं एक जीभ गुन अगनित हारि परयौ कछु कहत न आवति। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्याम कहत री प्यारी तू जे जे भाई ल्यावति॥ [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (66) (राग सारंगा) प्यारी तौपै कितौक संगरा छबीन कौ अंग अंग प्रति नाना भाई देखावती। [1]. [3] श्री हरिदास के स्वामी स्याम कहत री प्यारी तू जे जे भाई ल्यावती.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (66)
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