हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 50 of 69

(राग मलार) यह अचरज देख्यौ न सुन्यौ कहूँ नवीन मेघ संग बिजुरी एक रस। तामें मौज उठति अधिक बहु भाँति लस॥ [1] मन के हरिवे कौं और सुखनहिंने चितवत चितहिं करत बस। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी बिहारिनि जू कौ पवित्र जस॥ [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (91) (राग मलारा) यः अचरज देख्यौ न सुनायौ खून नया मेघ संग बिजुरी एक रस। मन में बहुत खुशी है.. [1] मन का कौन दुश्मन है, जो खुशी की चिंता करता रहता है? श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी बिहारिणी जू कौ पवित्र जस.. [2] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (91)
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