हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरें

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 51 of 69

(राग मलार) भींजन लागे री दोऊ जन। अँचरा की ओट करत दोऊ जन॥ अति उन्मत्त रहत निसि बासर, राग ही के रंग रंगे दोऊ जन। श्री हरिदास के स्वामी स्याम प्रेम परस्पर नृत्य करत दोऊ जन॥ - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमाल (93) (राग मलारा) भींजन लागे री दोउ जाण। अँधेरे आसमान में छुपी जोड़ी जान.. बहुत दीवानी सी जी रही है जोड़ी जान, रंगों से भरी है जोड़ी जान. श्री हरिदास के प्रभु स्याम प्रेम, युगल एक दूसरे के साथ नृत्य कर रहे हैं.. - ललिता अवतार श्री हरिदास जी, केलीमल (93)
हिंडोरे झूलत री सुरंग चूनरी पहिरेंसखी मोय बूँद अचानक लागी