झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़े

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 58 of 69

(राग गौरी) झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़े। हाँगत जोर सहित जैसौ जाकैं डाँड़ीब गहैं गाढ़े॥ बिच बिच प्रीति रहसि रस रीति की राग रागिनीन के जूथ बाढ़े। श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी राग ही के रंग रंगि काढ़े॥ - श्री स्वामी हरिदास जी, केलिमाल (107) (राग गौरी) झूलत डोल दूं जन ठाड़े। जैसे जकैन दंडीब गहहिं गधाये जोर शोर... प्रेम की पंक्तियों, प्रेम के सार और रीति के रहस्य के बीच रागिनी की धुन बढ़ती जाती है। श्री हरिदास के स्वामी श्याम कुंजबिहारी राग की रंगीन कढ़ाई.. - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (107)
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