झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़े

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 59 of 69

(राग गौरी) झूलत डोल श्रीकुंजबिहारी। दूसरी ओर रसिक राधावर नागरि नवल दुलारी॥ [1] राखे न रहत हँसत कहि कहि प्रिया बिलबिलात पिय भारी। [2] श्रीहरिदास के स्वामी स्याम कहत री प्यारी अबकैं राखि हा हा री॥ [3] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलिमाल (108) (राग गौरी) झूलत डोल श्रीकुंजबिहारी। दसारी या रसिक राधावर नागरी नवल दुलारी..[1] राखे न रहत हसत कहि प्रिय बिलबिलत पिया भारी। [2] श्री हरिदास के स्वामी श्याम कहते हैं, प्यारी अबकिन राखी हा हा री.. [3] - श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (108)
झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़ेदेखि देखि फूल भई