देखि देखि फूल भई

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 60 of 69

(राग कान्हरौं) आजु की बानिक प्यारे तेरी, प्यारी तुम्हारी बरनी न जाइ छबि।​ [1] इनकी स्यामता, तुम्हारी गौरता, जैसे सित-असित बैनी, रही ज्यौं भुवंगम दबी॥​ [2] इनकौ पीताम्बर, तुम्हारौ नील निचोल, ज्यों ससि कुंदन जेब रबि।​ [3] श्री हरिदास के स्वामी स्यामा-कुंजबिहारी की,​सोभा बरनी न जाये, जो मिलें रसिक कोटि कवी॥ [4] - श्री हरिदास, केलिमाल (29) (राग कन्हारों) आज प्रियतम, प्रियतम छवि, मत भटको। [1] उनका सौन्दर्य, आपका वैभव, सीता-असित बैनि, भुवंगम दबी.. [2] इनकौ पीताम्बर, आपके नील निकोल, जैसे ससि कुन्दन जेब रबी। [3] श्यामा-कुंजबिहारी की, श्री हरिदास की प्रभु शोभा। मत जाओ बरनी को, खोजो कोटि कवि... [4] - श्री हरिदास, केलीमल (29)
झुलत डोल दोऊ जन ठाढ़ेबचन दै मान न करौं