बचन दै मान न करौं
Kelimal — स्वामी श्री हरिदास
Verse 61 of 69
ऐसि तौ विचित्र जोरि बनी, ऐसि कहुँ देखि सुनि न बनी
- श्री हरिदास, केलिमाल
ऐसी ता विचित्र जोरी बानी, ऐसी कहूं देखी सुनि न बानी - श्री हरिदास, केलीमल श्री हरिदास जी कहते हैं कि यह दिव्य युगल प्रियतम का ऐसा आनंद है जो पहले कभी नहीं देखा या सुना गया था।