बिलसत प्यारी-लाल कुंज रजनी

Kelimal — स्वामी श्री हरिदास

Verse 62 of 69

(राग केदारौ) डोल झूलत दुलहिनि दूलहु। [1] उड़त अबीर कुमकुमा छिरकत खेल परस्पर सूलहु॥ [2] बाजत ताल रबाब और बहु तरनि तनया कूलहु। [3] श्रीहरिदास के स्वामी स्यामा कुंजबिहारी कौ अनतब नाहिंने फूलहु॥ [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमाल (48) (राग केदारौ) डोल झूलत दुलहिनी दुलहु। [1]. [3] श्री हरिदास के स्वामी श्यामा कुंजबिहारी मूर्ख नहीं हैं.. [4] - ललिता अवतार श्री स्वामी हरिदास जी, केलीमल (48)
बचन दै मान न करौंबचन दै मान न करौं