श्री राधा पद किंकरी, भाव जासु हिय होये।

Kishori Ali Granthavali — श्री किशोरी अलि

Verse 13 of 14

श्री राधा पद किंकरी, भाव जासु हिय होये। वृन्दावन रस कौ मधुर, स्वाद लहै है सोय॥ - श्री किशोर अली, किशोरी अली ग्रंथवाली (1040) श्री राधा पद किंकरी, भव जसु हिय होय। वृन्दावन का रस कितना मधुर है, स्वाद कितना मधुर है.. - श्री किशोर अली, किशोरी अली ग्रन्थावली (1040)
जो कोउ श्री राधा जस गावे। स्वामिनी कब यौं तुम्हे लड़ाऊँ