हमैं इक लाड़िली सौं काम

Kishori Ali Granthavali — श्री किशोरी अलि

Verse 7 of 14

हमारैं माई राधा नाम की टेक। राधा नाम उचारत मुख ते, जद्यपि ललित अनेक॥ [1] राधा नाम होहिं जिहिं ग्रन्थहि, पढ़त और नहीं नेंक। राधा नाम सुनैं निजु श्रवननि, कहै जु कोउ कितेक॥ [2] राधा नाम जपैं हम निशि-दिन, और दिए सब छेक। अली किशोरी राधा गावैं, लीनौं व्रत यह एक॥ [3] - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली हम मायरा राधा नाम लेते हैं। राधा का नाम मन में आता है, यद्यपि अनेक ललित हैं... [1] राधा का नाम सभी ग्रंथों में है, पढ़ा जाता है, कहा नहीं जाता। राधा नाम सुनैन निजु श्रावणी, कहै जू कोउ कितेक।।[2] राधा नाम हम नित जपते हैं, सब मरते हैं। अली किशोरी राधा गवैं, लिणौं व्रत यः एक.. [3] - श्री किशोरी अली, किशोरी अली ग्रंथावली
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