वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी
Verse 23 of 28
तेरे बदन की सोभा कहन कों, प्रिय मेरे नैननि रसनाहि दीजै।
इतनौ बर माँगत नवरंग प्रति, रोम रोम साँवल रस पीजै॥
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (85)
तेरे बदन की खूबसूरती कहाँ है मेरी जान, मुझे खूबसूरती मत दो। मैंने इतनी बार नवरंग प्रति मांगी, रोम-रोम में श्याम रस पिया... - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (85)