तेरे नैंननि की बलि जाउँँ
Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी
Verse 24 of 28
(राग मालव)
तेरे नैंननि की बलि जाउँँ।
मोहनलाल बाल-रस भींने,
जिय भावत इह नाऊँ॥ [1]
बलि-बलि चारु बिलोकनि ऊपर,
बलि बलि गोकुल गामु।
बलि-बलि ‘कृष्णदास’ बलिहारी,
गुनिजन चित-विश्रामु॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (76)
(राग मालवा) तुम्हारी दादी की बाली जौन। मोहनलाल बाला-रस भिन्ने, जिया भावत इह नौ.. [1] बालि-बालि चारु बिलोकनि ऊपर, बालि बालि गोकुल गामु। बाली-बाली 'कृष्णदास' बलिहारी, गुणीजन चिता-विश्रामु.. [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (76)