श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी

Krishnadas Vani

श्री कृष्णदास अधिकारी · 28 verses · Braj

  1. 1. ब्रज में रतन राधिका गोरी
  2. 2. बाँसुरी बाजत मदन मोहन जू की
  3. 3. ब्रज में रतन राधिका गोरी
  4. 4. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  5. 5. ब्रज में रतन राधिका गोरी
  6. 6. ग्वालिन कृष्ण दरस सों अटकी
  7. 7. हमारे तीरथ कौन करे
  8. 8. पोढ़े श्री राधा के गेह
  9. 9. जबते राधिका भूतल प्रगटी
  10. 10. जो बन बसौं तो बसौ वृन्दावन
  11. 11. तेरे नैंननि की बलि जाउँँ
  12. 12. लालन तेरे ही आए आजु सुहावनी राति
  13. 13. मन लाग्यो गिरधर गावै
  14. 14. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  15. 15. मेरे तो गिरिधर ही गुणगान
  16. 16. मो मन गिरधर छबि पै अटक्यो
  17. 17. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  18. 18. नाँचत मोहन संग राधिका
  19. 19. पोढ़े श्री राधा के गेह
  20. 20. राधा प्यारी! तू रसरंग भरी
  21. 21. ब्रज में रतन राधिका गोरी
  22. 22. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  23. 23. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  24. 24. तेरे नैंननि की बलि जाउँँ
  25. 25. तेरे रूप सम औरु नहीं
  26. 26. तेरी मैं अधिक चतुराई जानी
  27. 27. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत
  28. 28. वृषभानु कुँवरि खेलति बसंत