ग्वालिन कृष्ण दरस सों अटकी
Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी
Verse 6 of 28
(राग आसावरी)
ग्वालिन कृष्ण दरस सों अटकी।
बार बार पनघट पर आवति सिर यमुना जल मटकी॥ [1]
मनमोहन को रूप सुधानिधि पीवत प्रेम रस गटकी।
कृष्णदास धन्य धन्य राधिका लोकलाज सब पटकी॥ [2]
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (160)
(राग आसावरी) ग्वालिन कृष्ण दरस पुत्र अटाकी। पनघट पर बार-बार प्रकट हुआ यमुना जल पात्र का सिर.. [1] मनमोहन को प्रेम और प्रेम रस का रूप दिया गया। कृष्णदास धन्य धन्य राधिका लोकलाज सब पतकी.. [2] - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (160)