जबते राधिका भूतल प्रगटी
Krishnadas Vani — श्री कृष्णदास अधिकारी
Verse 9 of 28
(राग बिलावल)
जबते राधिका भूतल प्रगटी।
तबते विधि को मान हन्यो।
मेरी तो यह सृष्टि न होई अब कछु अद्भुत बान बन्यौ॥1॥
एक रूप एक वेष एक गुन वरन विलक्ष्यण ठन्यो।
कृष्णदास प्रभु श्री गिरधर ते केलि कला रस सरस सन्यो॥2॥
- श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (893)
(राग बिलावाला) जाबते राधिका सतही उन्नति। विधि का ध्यानपूर्वक पालन करें. ये रचना मेरी नहीं, अब तू कुछ अद्भुत हो गई..1..रूप, भेष, गुण, अनोखी बात. कृष्णदास प्रभु श्री गिरधर ते केलि कला रस सरस संयो..2.. - श्री कृष्णदास, श्री कृष्णदास अधिकारी जी की वाणी (893)