रस में रहत गढ़ी हो रसिकनी
Kumbhandas Vani — श्री कुम्भनदास
Verse 7 of 23
महारानी श्री राधिका, अष्ट सखियन के झुंड।
डगर बुहारत साँवरौ, जय जय राधा कुंड॥
- श्री कुंभनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी
महारानी श्रीराधिका, आठ सखियों का समूह। डगर बुहारत संवरो, जय जय राधा कुंड.. - श्री कुम्भनदास, श्री कुम्भनदास जी की वाणी