परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 17 of 35
प्रसाद बिहारिनि रानी को,
अति आनंद बड़े छिन ही छिन महाप्रेम सुखदानी को।
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त के पद (६३)
रानी बिहारिणी को प्रसाद, अपार हर्ष और सुखदानी को अपार प्रेम। - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के दोहे (63) प्रसाद बिहारिणी महारानी श्री राधारानी का अनंत आनंद हर पल का आनंद बढ़ाता है, यह महान प्रेम आनंद देता है। मेरे जीवन का प्राण श्री राधारानी का प्रसाद है।