परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 20 of 35
राधे रसिक सिरोमनि प्यारी है। [1]
अति आनंद भरी सुखरासी छिन हूँ होत न न्यारी है॥ [2]
महा रूप छिन ही छिन बाढे अद्भुत प्रीति सौं भारी है। [3]
श्रीललितकिसोरी तनमन मिलि कै विहरत केलिविहारी है॥ [4]
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (67)
राधे रसिक सिरोमणी प्यारी है. [1] परमानंद सुख निराला नहीं.. [2] महान रूप छीना, अद्भुत प्रेम सौ भारी। [3] श्री ललित किशोरी तनमन मिलि के विहारत केलिविहारी हैं.. [4] - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (67)