परसाद विहारिनि रानी कौ

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 21 of 35

राधे रसिक सिरोमनि रानी। अदभुत रूप रंग कौ सागर महा प्रेम सुख सानी॥ (1) मिलत मिलत में चाह चौगुनी मिलिबे ही की बानी। श्रीललितकिसोरी प्रीति बढावति अति जाननिमनि मानी॥ (2) - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (68) राधे रसिक सिरोमणी रानी। अद्भुत रूप, रंग, सागर, अपार प्रेम, खुशियाँ... (1) मिलते ही प्यार चौगुना हो जाता है। श्री ललित किशोरी प्रीति बधावति अति जननीमणि मणि.. (2) - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (68)
परसाद विहारिनि रानी कौपरसाद विहारिनि रानी कौ