परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 22 of 35
साधौ ऐसौ महल हमारौ।
निर्गुण सगुण वारिहै जाकी कहत न वेद विचारौ॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (101)
साधौ ऐसौ महल हमरौ। निर्गुण सगुण वारिहै जाकी कहत न वेद विचारौ.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू के वचन, सिद्धांत (101)