परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 23 of 35
सखी मेरो वृन्दावन सुख धाम।
प्रियालाल को लाड़ लड़ावत सब विधि पूरन काम॥
महा प्रेम सोभा कौ सागर रोंम रोंम अभिराम।
ललित रसिकवरजू की जीवनि कुंज केलि विश्राम॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत के पद (113)
मेरे मित्र, वृन्दावन सुख का धाम है। प्रियालाल की लड़ाई, लड़ाई, सब पुराने तरीके... महा प्रेम सोभा कौ सागर रोनाम रोनाम अभिराम। ललित रसिकवराजू कुंज केली विश्राम की जीवनी.. - श्री ललित किशोरी देव, शब्द, श्री ललित किशोरी देव जू के सिद्धांत (113)