परसाद विहारिनि रानी कौ
Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव
Verse 27 of 35
श्रीवृंदाविपुन विहार निजु, श्रीस्वामी कौ रूप।
गौर-स्याम हिरदै दोऊ, बिहरैं केलि अनूप॥
- श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धान्त की साखी (443)
श्री वृंदाविपुन विहार निजु, श्री स्वामी कौ रूप। गौरा-स्याम हिरदै दोउ, बिहारैं केलि अनुप। - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की वाणी, सिद्धांत साखी (443)