हमारे महल कौ नातौ साँचौ

Lalit Kishori Vani — श्री ललित किशोरी देव

Verse 34 of 35

श्री वृन्दाविपिन के वास की, यही रीति सो जानि। निर्दोषिक निष्काम ह्वै, सेवौ रस की खानी॥ - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की साखी (441) श्रीवृन्दाविपिन के निवास समान सोयें। मासूम और निस्वार्थ, प्रेम की कहानी.. - श्री ललित किशोरी देव, श्री ललित किशोरी देव जू की बानी, सिद्धांत की सखी (441)
हमारे महल कौ नातौ साँचौआली जुगुलविहार रस