गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 1 of 32

आयौ बसंत मदन दल साजे दुहुँ दिसि ह्वै गई भीर। अबीर गुलाल उड़त नैंननि सों रस बिबस बिसरि गये चीर॥ [1] खेलत हँसत हँसावत सब मिलि धरत नहीं मन धीर। श्री ललितमोहिनी को सुख बाढ्यौ धन्य आजु दिन बीर॥ [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (50) आयु बसंत मदन दल धूएँ और बादलों से सजाया जाता है। भूल गए अबीर गुलाल उड़ना, माँ, माटी, बेटा, रस और प्यार। श्री ललितमोहिनी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ, आज आप धन्य हैं.. [2] - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (50)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज