गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 2 of 32

अब लियौ अब लियौ अब लियौ रे, ऐसी जो जिय होय। श्रीवृन्दावन में पैंडहूँ, पल मति बिछुरौ कोय॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19) अभी लेट जाओ, अभी लेट जाओ, ताकि तुम जीवित रह सको। श्री वृन्दावन पुरुष दर्दहूं, पल मति बिछरू कोई.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (19)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज