गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज
Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव
Verse 12 of 32
हौं बूड़न कौं बहु करौं, हरि नहिं बूड़न देहिं।
ज्यौं-ज्यौं उझकौं कूप में, त्यौं-त्यौं कर गहि लेहिं॥
- श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (39)
मैं बुडन हूं, किससे शादी करूं, हरि, मैं बुडन नहीं हूं। जैसे ही प्रसिद्ध व्यक्ति जाता है, मैं गहराई से देखता हूं.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की आवाज (39)