गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 11 of 32

गुरु राखै फूटौ करवा, लगावै रज। चेला रंगै बाँकी, बनावै सज॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (35) गुरु रखोगे तो बँटवारा करा दोगे और राज स्थापित हो जायेगा। बाकी काम शिष्य करता है, चित्रकारी और आभूषण बनाना.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (35) यह कैसी विडम्बना है कि वृन्दावन के रसोपक गुरु बहुत ही सात्विक जीवन जीते हैं। वे टूटा हुआ करुआ अपने पास रखते हैं, श्रीधाम वृन्दावन की पवित्र रज को तन-मन पर धारण करते हैं और सच्ची भक्ति में लीन रहते हैं। परन्तु उनके कुछ शिष्य वृन्दावन के राज्य को तुच्छ समझते हैं, उन्हें इससे कोई सरोकार नहीं है। वे सजते-संवरते हैं, सजते-संवरते हैं और धूमधाम और दिखावे में शामिल होते हैं।
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज