गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 14 of 32

जिनहिं देखि हरि देखिये, तिनहिं भाव सों देखि। ए वे वे ए एक हैं, श्रीमुख कही विसेखि॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (11) जो देखो वही हरि है, तीन भाव देखो बेटा। वह एक ही है, वह एक है, श्रीमुख कहि विसेखी.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (11)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज