गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 15 of 32

करुवा, गूदरा, अमृती, चीपी, कठुला, माला, बाँकी। ललित केलि निरखत रहैं, रंग-महल की झाँकी॥ - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (26) करुवा, गुदारा, अमृति, चिपी, कटुला, माला, बांकी। ललित केलि अलिखित रह गई, रंगमहल की झांकी.. - श्री ललितमोहिनी देव, श्री ललितमोहिनी देव जू की वाणी (26)
गुरु राखै फूटौ करवा लगावै रजगुरु राखै फूटौ करवा लगावै रज