मगन भये गुन गावैं। प्रिया चरन छिन छिन सहरावैं॥

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 30 of 32

मगन भये गुन गावैं। प्रिया चरन छिन छिन सहरावैं॥ बसि वृन्दावन अनत न जावैं। ललित मोहिनी तिन्हैं लड़ावैं॥ - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वानी, सिद्धांत के पद (13) खुश रहो और गुण गाओ. प्रिया के कदमों ने सहारा छीन लिया... लेकिन मैं कभी वृन्दावन नहीं गया। ललित मोहिनी तिन्हैं लड़वैं.. - श्री ललित मोहिनी देव, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, सिद्धांत पद (13)
मान न कीजै प्रान पियारी जूश्री कुञ्ज बिहारी भजन कर, श्री कुञ्ज बिहारी देख।