मान न कीजै प्रान पियारी जू

Lalit Mohini Vani — श्री ललित मोहिनी देव

Verse 29 of 32

मान न कीजै प्रान पियारी जू। [1] मेरी जीवन प्रान मोहनी तेरे बल बलिहारी जू॥ [2] तुम समझाओ सखी जुगति करि या रस विवस बिहारीजू। [3] श्रीललिमोहनी नैंन सैंन दै सुख उपजावत भारी जू॥ [4] - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के पद (53) ऐसा मत सोचो प्रिये. [1] मेरी प्यारी प्यारी मोहिनी, मुझे अपनी शक्ति अर्पित करो.. [2] तुम समझो सखी, मैं जुगति कारी हूं या रस विवस, बिहारीजू। [3] श्री ललित मोहिनी नैनन साई दाई सुख उपजवत भारी जू.. [4] - श्री ललित मोहिनी देव जू, श्री ललित मोहिनी देव जू की वाणी, रस के छंद (53)
आजु बधाई श्रीवृन्दावनमगन भये गुन गावैं। प्रिया चरन छिन छिन सहरावैं॥